Tuesday, 18 October 2016

    सर्कस का उत्साह और पिता की नेकी

     


यह काजल की कहानी है,जिसने सर्कस के बदले कुछ और देखा
काजल सातवीं कक्षा में पढ़ती थी। उसके पिता एक चीनी मिल में इंजीनियर थे। उन्हें अपनी बेटी के साथ रहने का काफी कम समय मिल पाता था। उस दिन रविवार था और शहर में सर्कस लगा हुआ था। काजल ने कभी भी सर्कस नहीं देखा था, औऱ वो कई दिनों से अपने पिता से सर्कस दिखाने की जिद कर रही थी। उस दिन उसके पिता का अवकाश था। इसलिए अपनी बेटी का मन रखने के लिए वो उसको सर्कस दिखाने लेकर गए।

काजल के पिता टिकट खरीदने गए तो काजल भी अपने पिता के साथ टिकट खिड़की के समीप ख़ड़ी थी,,।। उनके पास ही एक बड़ा सा परिवार भी खड़ा था,, जिसमें दो लड़कियां और छ: लड़के थे। उनके माता पिता सबसे आगे एक दूसरे का हाथ पकड़ कर खड़े थे। उनको देखकर साफ कहा जा सकता था कि वे एक दूसरे की ताकत थे। सभी बच्चें सर्कस देखने के लिए काफी उत्साहित थें। और उनकी बातों से साफ लग रहा था कि वे भी काजल की तरह ही पहली बार सर्कस देखने आए है। कोई कह रहा था कि जोकर हाथी को चलाता है तो कोई कह रहा था कि जोकर सिर्फ साईकिल चलाता है। काजल और उसके पिता उनकी बातें सुनकर मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे।

आखिरकार टिकट खिड़की पर उनकी बारी आ ही गई। आठ बच्चों के पिता ने कहा आठ बच्चों के और छ: और दो बड़ो के । खिड़की पर खड़े शख्स ने पैसे बताए। पैसे सुनते ही बच्चों काी मांँ  ने पिता का हाथ छोड़ दिया । वह परेशान अपने पति की ओर देखने लगीं। पिता ने एक बार फिर से लेकिन इस बार थोड़ी मायूस आवाज में पूछा जी कि.. कितना बताया  ’? एक बार फिर काउंटर पर बैठे शख्स से पैसे बताए। पिता का मुँह उतर गया।

 वह पलटकर अपने बच्चों की तरफ देखने लगा और सोचने लगा कि उन्हें कैसे बताए कि उसके पास पैसे कम है। काजल के पिता ने काजल की तरफ देखा और धीरे  से सौ रूपए का नोट पास में जमीन पर गिरा दिया। ऐसा  कतई नहीं था कि उनके पास बहुत पैसे थे। लेकिन उन बच्चों की खुशी के मोल को आगे पैसों का मोल कम पड़ गया था। काजल के पिता उन बच्चों के पिता से बोले कि शायद आपके कुछ पैसे गिर गए है।  ’बच्चों के पिता समझ गए ।

उन्होनें वह नोट उठाया और काजल के पिता का हाथ पकड़कर उनकी तरफ रूआंसी आंखो से देखते हुए बोले ‘  शुक्रिया काजल और उसके पिता मुस्कराते हुए वापस अपनी गाड़ी की तरफ लौट गए । काजल उस दिन सर्कस तो नहीं देख पाई लेकिन उस दिन जो उसने देखा, वह उसके जीवन की अब तक की सबसे बड़ी सीख थी।



खुशियां दूसरों के साथ बांटने से और बढ़ जाती हैं ।।

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