Tuesday, 23 August 2016

भाई-बहन का प्यार (विनीत मिश्र)

भाई-बहन का प्यार 


       एक बार एक पाँच साल की बच्ची , अपने तीन साल के भाई को गोद में लेकर पहाड़ के कठिन और थका देने वाले रास्ते पर चल रही थी. उस लड़की के पीछे पीछे एक महात्मा जी भी जा रहे थे ,  
    उन्होंने देखा की छोटी बच्ची बहुत ही ज्यादा थक चुकी है और पसीने से तरबतर हो चुकी है , महात्मा जी ने उस छोटी बच्ची से पूछा , कि बेटा आप थक नहीं रहे हो ? 
     उस बच्ची ने जवाब दिया, नहीं , और चुपचाप आगे आगे चलने लगी , 
    महात्मा जी भी उसके पीछे पीछे ही चलने लगे , महात्मा जी से उस लड़की की ये हालत देखी नहीं जा रही थी , तो उन्होंने उससे कहा की अपने भाई को कुछ देर के लिए मेरी गोद में दे दो , 
     बच्ची ने ऐसा करने से मना कर दिया , महात्मा जी ने कुछ दूर चलने के बाद फिर अपना सवाल दोहराया की बेटा आप थक नहीं रहे हो ? उसने फिर जवाब दिया , नहीं। 
      महात्मा जी आश्चर्य में पड़ गए कि ये ऐसा कैसे कर पा रही है, उन्होंने फिर कई बार यही सवाल उस बच्ची से पूछा लेकिन अब वो लड़की महात्मा जी को नजरअंदाज करने लगी थी , 
    उनके साथ होने के बावजूद वो उनकी बातो को अनसुना कर लगे थी , जिस कारण अब महात्मा जी का धैर्य जवाब देने लगा था , और आखिर में थकहार कर महत्मा जी ने गुस्से में आकर , बच्ची से वही सवाल दोबारा पूछा तो , लड़की ने ऐसा उत्तर दिया की महात्मा जी मौन हो गए ,,,,,, 

    उस बच्ची ने उत्तर दिया की ये मेरा भाई है, इसलिए मैं थक नहीं रही हू । इस कहानी को लिखने का कारण सिर्फ इतना सा है की आप सब अपनी बहनो को उचित सम्मान दे और उनके प्रति अपने प्यार को कभी भी कम ना होने दे ||


श्रेष्ठ शिक्षक

उनकी करुणा में कोई कमी है नही, योग्यता में हमारी कमी रह गयी, सूर्य के उगने में कोई कमी है नही, पात्रता में हमारी कमी रह गयी। आप सभी को d...